मधेपुरा, जिला मुख्यालय स्थित वेद व्यास महाविद्यालय के प्रांगण में साहित्य जगत के विख्यात साहित्य वाचस्पति परमेश्वरी प्रसाद मंडल की 29वीं पुण्यतिथि अत्यंत भव्य और भावपूर्ण वातावरण में मनाई गई। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, साहित्यकारों, जनप्रतिनिधियों एवं परिजनों ने उनके जीवन, व्यक्तित्व और साहित्यिक योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
संघर्ष से शिखर तक का प्रेरक जीवन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि परमेश्वरी बाबू का जीवन इस बात का प्रमाण है कि अभाव और संघर्ष ही प्रतिभा को निखारते हैं। उन्होंने कहा,
“एक साधारण ग्रामीण परिवेश में जन्मा बालक अपनी मेहनत, लगन और साहित्य के प्रति समर्पण से साहित्य जगत की ऊंचाइयों तक पहुंचा। उनकी कृतियां आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं।”
ज्ञात हो कि परमेश्वरी प्रसाद मंडल का जन्म 1 अगस्त 1921 को मधेपुरा के बालम गढ़िया में हुआ था। उन्होंने टीएनबी कॉलेज, भागलपुर से स्नातक (बीए) की शिक्षा प्राप्त की। जीवनपर्यंत संघर्षों के बावजूद उनकी लेखनी सशक्त और प्रभावशाली रही। साहित्य वाचस्पति की उपाधि प्राप्त कर उन्होंने साहित्य जगत में अमिट पहचान बनाई।
गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा पदाधिकारी संजय कुमार के अलावा सचिन्द्र महतो (पूर्व कुलसचिव, बीएनएमयू), प्रो. विनय चौधरी (पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष, बीएनएमयू) एवं प्रो. आलोक कुमार (पूर्व समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष, पार्वती विज्ञान महाविद्यालय) उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के संस्थापक डॉ. रामचंद्र प्रसाद मंडल ने की।
परमेश्वरी बाबू के सुपुत्र सोमनाथ यादव, वीरेंद्र यादव सहित परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित रहे। चुनचुन मुखिया, रंजीत कुमार (वर्तमान मुखिया), अनिल कुमार अनल, पैक्स अध्यक्ष भूषण कुमार एवं मनोरंजन कुमार ने भी अपने विचार रखे।
युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश
वक्ताओं ने परमेश्वरी प्रसाद मंडल के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जिस प्रकार साहित्य साधना की, वह अनुकरणीय है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्राचार्य आलोक बाबू, संजय कुमार, प्रेमलता, अमलेश कुमार, दिलीप कुमार, पूजा प्रिया, भगवती शुक्ला, कुमारी मधु एवं तकनीकी टीम के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह पुण्यतिथि समारोह न केवल एक महान साहित्यकार की स्मृति को जीवंत रखने का अवसर बना, बल्कि युवा पीढ़ी को संघर्ष, समर्पण और साहित्य प्रेम का संदेश भी दे गया।














