पटना। बिहार की राजधानी पटना से मानवता और अंगदान की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने तीन लोगों की जिंदगी में नई रोशनी भर दी है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 16 वर्षीय मोनू कुमार भले ही जिंदगी की जंग हार गया, लेकिन उसके परिजनों के अंगदान के फैसले ने तीन जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे दिया। मोनू के लिवर और दोनों किडनी का दान किया गया, जिसके बाद तीन अलग-अलग मरीजों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को सड़क हादसे में मोनू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गया था। वह पटना के पुनाईचक स्थित हनुमान नगर निवासी सुभाष कुमार का पुत्र था। हादसे के बाद उसे इलाज के लिए मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 19 से 21 अक्टूबर तक उसका उपचार चला। इसके बाद 21 अक्टूबर को उसे पटना स्थित IGIMS के क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान चिकित्सकों ने पाया कि सिर में गंभीर चोट के कारण मोनू कोमा में चला गया था। उसके फेफड़े भी काम नहीं कर रहे थे और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। काफी प्रयासों के बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद चिकित्सकीय प्रक्रिया के तहत ब्रेन डेथ की पुष्टि की गई। ब्रेन डेथ की सूचना संस्थान की ब्रेन डेथ कमेटी को दी गई। कमेटी ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद मोनू को ब्रेन डेड घोषित किया।
परिजनों के फैसले ने बचाई तीन जिंदगियां : मोनू की स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संस्थान के चिकित्सकों और अधिकारियों ने परिजनों को अंगदान के महत्व की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों ने साहसिक फैसला लेते हुए मोनू के लिवर और दोनों किडनी दान करने की सहमति दे दी। इस फैसले के बाद IGIMS प्रशासन ने अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार, गैस्ट्रो सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मंडल तथा अन्य चिकित्सकों की टीम ने इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंगदान की सूचना सोटो बिहार के अध्यक्ष एवं निदेशक सहित संबंधित संस्थानों और अधिकारियों को दी गई। इसके बाद जरूरतमंद मरीजों की प्राथमिकता सूची के आधार पर अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की गई।
बिहार में पहली बार सरकारी खर्च पर हुआ लिवर ट्रांसप्लांट : इस मामले की एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि IGIMS पटना में बिहार सरकार के पूर्ण खर्च पर पहली बार लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने इस कार्य के लिए प्रति मरीज 15 लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की थी। इसके तहत मोनू के लिवर से एक 19 वर्षीय महिला को नया जीवन मिला। IGIMS के गैस्ट्रो सर्जरी एवं लिवर ट्रांसप्लांट विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने 5 नवंबर 2026 को सफलतापूर्वक लिवर प्रत्यारोपण किया।
वहीं, मोनू की एक किडनी का प्रत्यारोपण IGIMS के यूरोलॉजी विभाग में किया गया। इस ऑपरेशन में डॉ. रोहित उपाध्याय, डॉ. एहसान अहमद, डॉ. प्रद्योत शाही और डॉ. निखिल रंजन सहित चिकित्सकों की टीम शामिल रही। दूसरी किडनी का प्रत्यारोपण ESIC अस्पताल, पटना में किया गया।
मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने दी बधाई : IGIMS के उप निदेशक (प्रशासन) एवं प्रवक्ता डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के प्रयासों से संस्थान में बिहार सरकार के अनुदान से लिवर ट्रांसप्लांट संभव हो सका है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बिहार में पहली बार सरकारी खर्च पर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया है। उन्होंने अंगदान करने वाले परिवार के प्रति आभार जताया और कहा कि इस पहल से न केवल तीन लोगों को नया जीवन मिला है, बल्कि पूरे बिहार में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति भी आभार व्यक्त किया। वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस नेक कार्य के लिए स्वास्थ्य मंत्री, IGIMS के निदेशक, चिकित्सकों और पूरी टीम को बधाई दी।
एक हादसे ने मोनू को परिवार से छीन लिया, लेकिन उसके परिजनों के साहसिक फैसले ने तीन परिवारों को खुशियां लौटा दीं। मोनू अब इस दुनिया में नहीं है, मगर उसके अंगों के जरिए तीन लोगों की जिंदगी में उम्मीद की नई किरण जगी है।















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