नवाचारी शिक्षण पद्धति और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए मिला सम्मान, उपलब्धि को माता-पिता, गुरुजनों और विद्यालय परिवार को किया समर्पित

मधेपुरा। शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारपूर्ण योगदान और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत मधेपुरा की शिक्षिका गीतांजलि को राज्य स्तरीय ‘शिक्षा रत्न सम्मान 2026’ से सम्मानित किया गया है। एक नवंबर 2026 को बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर के सीनेट हॉल में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में उन्हें मोमेंटो एवं प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि से जिले के शिक्षा जगत में खुशी का माहौल है।

समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) दिनेश चन्द्र राय उपस्थित रहे, जबकि अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पटना विश्वविद्यालय एवं नालंदा खुला विश्वविद्यालय, पटना के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) के. सी. सिन्हा शामिल हुए। इनके अलावा सारण के विधान पार्षद सच्चिदानंद राय, पटना विश्वविद्यालय के विधि विभाग के प्रोफेसर एवं पटना विधि महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य तथा पूर्व डीन प्रो. (डॉ.) वाणी भूषण, शिक्षाविद् डॉ. गुरु एम. रहमान, बिहार विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) समीर कुमार शर्मा तथा बिहार सरकार के सीआईडी निदेशक बी. के. चौधरी सहित शिक्षा, प्रशासन, विधि एवं सामाजिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।

गीतांजलि मधेपुरा जिले के कटहरवा स्थित उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे लंबे समय से सरकारी विद्यालय में शिक्षा को अधिक रोचक, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी बनाने के लिए नवाचारपूर्ण प्रयोग कर रही हैं। उनकी शिक्षण पद्धति में गतिविधि आधारित शिक्षण, प्रोजेक्ट आधारित लर्निंग (पीबीएल) और ‘कबाड़ से जुगाड़’ जैसी रचनात्मक गतिविधियां शामिल हैं। इन माध्यमों से वे विद्यार्थियों में तार्किक क्षमता, जिज्ञासा, रचनात्मकता और समस्या समाधान की समझ विकसित करने का प्रयास कर रही हैं।

बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर

गीतांजलि का मानना है कि शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक बच्चे को अपनी प्रतिभा पहचानने, सवाल पूछने, नए प्रयोग करने और जीवन में आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से वे विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार, नियमित उपस्थिति, आत्मविश्वास और सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। विद्यालय से दूर हो रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना तथा उनमें सीखने की ललक पैदा करना भी उनके शैक्षिक प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उनका कहना है कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ पढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों के सपनों को दिशा देना, उनके भीतर आत्मविश्वास जगाना और उन्हें बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना भी है। एक शिक्षक की सबसे बड़ी उपलब्धि उसके विद्यार्थियों की सफलता, उनके चेहरों की मुस्कान और उनके जीवन में आने वाला सकारात्मक बदलाव है।

माता-पिता, गुरुजनों और विद्यालय परिवार को समर्पित किया सम्मान

शिक्षा रत्न सम्मान मिलने पर गीतांजलि ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इस उपलब्धि को अपने माता-पिता, गुरुजनों, विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक साथियों और विद्यार्थियों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि सभी का स्नेह, प्यार और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा, “यह पुरस्कार केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी बच्चों के भविष्य के प्रति मेरी जिम्मेदारी का प्रतीक है, जिनका भविष्य संवारने का मुझे अवसर मिला है। शिक्षा ही सेवा है और यह सम्मान उसी अटूट निष्ठा को समर्पित है।”

उन्होंने टीएफएम बिहार की पूरी टीम, बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति, सभी सम्मानित अतिथियों, आयोजन समिति और अपने सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। गीतांजलि ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक समर्पण, नवाचार एवं प्रतिबद्धता के साथ काम करने की प्रेरणा भी है।