मधेपुरा/ सामाजिक कुप्रथा के अनुसार बेटा ही पिता की चिता को मुखाग्नि देता है, लेकिन यह रूढ़िवादी प्रथा अब गुजरे जमाने की हो चुकी है। चौसा में यह प्रथा तब टूटी, जब एक बेटी ने शव यात्रा में पिता की अर्थी को कंधा दिया और हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक पिता को मुखाग्नि दी। इसके बाद बेटी ने कहा कि ये समाज के लिए संदेश है कि बेटी किसी भी मामले में बेटे से कमतर नहीं है।बेटी के इस कदम को देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।पिता के निधन से पूरा परिवार और मोहल्ला सदमे में है।बेटी के इस साहसिक कदम की सराहना हो रही है।

आधुनिक युग में बेटियां किसी मामले में बेटों से कमतर नहीं हैं। जो काम बेटा कर सकता है, वही काम बेटी भी बखूबी कर सकती है।काम चाहे घर की चारदीवारी के भीतर का हो या घर से बाहर का।बेटियां उसे बड़े शिद्दत से निभा रही हैं।बेटी द्वारा पिता का अंतिम संस्कार करने का सीन जिसने भी देखा, उनकी आंखें नम हो गईं।शव यात्रा में शामिल लोगों ने बेटियों के प्रति श्रृद्धा से सिर झुकाया। दरअसल,चौसा निवासी 50 वर्षीय प्रमोद कुमार चौरसिया उर्फ पप्पू जी का बीते गुरुवार को लंबी बीमारी से निधन हो गया।दोनों बेटियों ने बीमारी की हालात में उसके इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ी।पटना के igms में महीनों इलाज करवाया औऱ अंत समय में चिकित्सक ने जवाब दे दिया। उनके परिवार में मुखाग्नि देने के लिए कोई बेटा नहीं था। उनकी मृत्यु के बाद अर्थी को कंधा और चिता को मुखाग्नि देने की रस्म बेटियां ही निभाई।

लक्ष्मी कुमारी औऱ पूजा कुमारी ने अंतिम यात्रा में पिता की अर्थी को कंधा दिया। पूजा कुमारी ने बेटे का फर्ज निभाने के लिए हिंदू रीति रिवाज के साथ मुखाग्नि देकर मिसाल पेश की।चार वर्ष पूर्व माँ का भी निधन हो गया था।मोहल्ले के लोग बताते हैं कि गरीब परिस्थिति होने के बाद भी पप्पूजी ने अपनी दोनों बेटियों को बड़े लाड़ प्यार से पाला पोसा।उन्होंने बेटियों को बेटों से कम नहीं समझा।उन्हें कभी भी गरीबी का एहसास नहीं होने दिया।लक्ष्मी और पूजा को खूब पढ़ाया लिखाया।

निधन पर बीस सूत्री अध्यक्ष मनोज प्रसाद,शिक्षक नेता सुबोध कुमार पासवान,सत्यप्रकाश गुप्ता विदुरजी,मनोज शर्मा, सुनील जायसवाल,रामलखन चौधरी,आशीष कुमार जायसवाल,शिक्षक जवाहर चौधरी, डॉ मनोज कुमार मंडल,साहित्यकार संजय कुमार सुमन,गुड्डू नयन,प्रीतम चौरसिया,प्रवेश चौरसिया,सुबोध चौरसिया, हरीश चौरसिया ने गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की है।