मधेपुरा। सपने बड़े हों और मेहनत सच्ची हो तो परिस्थितियां रास्ता नहीं रोक पातीं। मधेपुरा के राहुल कुमार ने अपनी लगन, संघर्ष और वर्षों की अथक मेहनत के बल पर यह साबित कर दिया है। जिस परिवार की एक पीढ़ी चपरासी रही, दूसरी पीढ़ी किरानी (क्लर्क) बनी, उसी परिवार का बेटा आज बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल कर राजस्व पदाधिकारी (RO) बनने जा रहा है।
राहुल कुमार के दादा स्व अशर्फी राय एक चपरासी थे। उनके पिता लाल शंकर राय समाहरणालय में सहायक प्रशासी पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार ने हमेशा शिक्षा को महत्व दिया और उसी का परिणाम आज पूरे मधेपुरा के सामने है।
राहुल की शुरुआती पढ़ाई मधेपुरा में ही हुई। उन्होंने वर्ष 2010 में शिव नंदन प्रसाद मंडल इंटर स्तरीय विद्यालय, मधेपुरा से मैट्रिक और वर्ष 2012 में पार्वती साइंस कॉलेज, मधेपुरा से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से वर्ष 2017 में स्नातक की पढ़ाई पूरी की।
लेकिन सफलता का यह सफर आसान नहीं था। राहुल ने कई बार असफलताओं का सामना किया। 67वीं BPSC में इंटरव्यू तक पहुंचे, 68वीं और 69वीं BPSC में मेंस परीक्षा तक पहुंचे, लेकिन अंतिम सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। लगातार प्रयास जारी रखा और आखिरकार 70वीं BPSC में 1192वीं रैंक प्राप्त कर सफलता हासिल कर ली।

राहुल बताते हैं कि कोरोना काल के बाद उन्होंने घर पर रहकर लगातार सेल्फ स्टडी की। उन्होंने मुख्य रूप से स्वयं अध्ययन पर भरोसा किया और केवल विज्ञान विषय के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की मदद ली। उनका वैकल्पिक विषय इतिहास (History) था और उन्होंने अंग्रेजी माध्यम से परीक्षा दी।
राहुल कहते हैं, “चार साल तक लगातार मेहनत की। कई बार लगा कि मंजिल दूर है, लेकिन खुद को खुद ही प्रेरित करता रहा। हर असफलता ने मुझे और मजबूत बनाया। अगर लक्ष्य बड़ा है तो संघर्ष भी बड़ा होगा।”
उनका सपना यहीं रुकने वाला नहीं है। राहुल ने 71वीं BPSC की मुख्य परीक्षा भी लिखी है और भविष्य में IAS अधिकारी बनने का सपना संजोए हुए हैं।
राहुल की सफलता के पीछे उनके परिवार का त्याग भी कम नहीं रहा। उनके पिता लाल शंकर राय भावुक होकर बताते हैं कि बेटा दिन-रात पढ़ाई में जुटा रहता था।
“राहुल रात में हमारे साथ एक बार खाना खाता था। फिर आधा खाना बचाकर रख देता था। देर रात जब पढ़ाई पूरी होती और भूख लगती तो वही खाना खाता था। कई वर्षों तक उसने अपने आराम और शौक त्याग दिए। उसकी मेहनत देखकर हमें विश्वास था कि एक दिन वह जरूर सफल होगा।”
आज राहुल की सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरणादायक कहानी बन गई है। यह कहानी बताती है कि सफलता विरासत में नहीं मिलती, बल्कि मेहनत से अर्जित की जाती है।
मधेपुरा के इस होनहार बेटे ने उन हजारों युवाओं को एक संदेश दिया है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।
राहुल कहते हैं, “असफलता से घबराइए मत। लगातार मेहनत करते रहिए। अगर आप रुकेंगे नहीं, तो सफलता भी एक दिन आपका रास्ता नहीं रोक पाएगी।”
आज पूरे मधेपुरा को राहुल कुमार पर गर्व है। चपरासी के पोते और किरानी के बेटे ने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई जाति, वर्ग या पद नहीं होता, उन्हें केवल मेहनत और हौसले की जरूरत होती है।















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