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  • 9 मई को राष्ट्रीय लोक अदालत: सिविल कोर्ट में तैयारियां तेज, हजारों मामलों के निष्पादन का लक्ष्य

    अब तक कुल 818 मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिजली विभाग से जुड़े 586 मामले, चेक बाउंस के 35 मामले, वन विभाग के 5 मामले और माप-तौल विभाग के 10 मामले निष्पादन के लिए चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा अपराधिक सुलहनीय 3772 मामलों को भी लोक अदालत के लिए चयनित किया गया है, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है।


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    मधेपुरा। मधेपुरा सिविल कोर्ट में 9 मई को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल पर विभिन्न विभागों और न्यायालयों में लंबित व सुलहनीय मामलों के तेजी से निष्पादन की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

    अब तक कुल 818 मामलों में नोटिस जारी किए जा चुके हैं। विभागवार आंकड़ों पर नजर डालें तो बिजली विभाग से जुड़े 586 मामले, चेक बाउंस के 35 मामले, वन विभाग के 5 मामले और माप-तौल विभाग के 10 मामले निष्पादन के लिए चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा अपराधिक सुलहनीय 3772 मामलों को भी लोक अदालत के लिए चयनित किया गया है, जो इस पहल की व्यापकता को दर्शाता है।

    लोक अदालत की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जिले के सभी 13 थाना क्षेत्रों में नोटिस तामिला हेतु आवश्यक दस्तावेज संबंधित थानाध्यक्षों को भेज दिए गए हैं। साथ ही, विभिन्न न्यायालयों और विभागों में सुलहनीय मामलों की पहचान के लिए पारा लीगल वॉलंटियर की तैनाती की गई है, जो आम लोगों को न्यायिक प्रक्रिया से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    पूजा कुमारी साह (सचिव-सह-जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकार)

    इस पूरी प्रक्रिया की लगातार निगरानी पूजा कुमारी साह (सचिव-सह-जज, जिला विधिक सेवा प्राधिकार) द्वारा की जा रही है। उन्होंने बताया कि लोक अदालत एक ऐसा मंच है, जहां पक्षकारों की सहमति से त्वरित, सस्ता और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराया जाता है।

    उन्होंने जानकारी दी कि 9 मई को जिला न्यायालय मधेपुरा एवं अनुमंडल न्यायालय उदाकिशुनगंज में लोक अदालत का आयोजन होगा, जिसमें मुकदमा पूर्व एवं लंबित वाद, आपराधिक सुलहनीय वाद, एनआई एक्ट धारा 138 (चेक बाउंस), बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण, राजस्व, बिजली-पानी बिल सहित कई प्रकार के मामलों का निष्पादन किया जाएगा। इसके अलावा वेतन-भत्ता, सेवानिवृत्ति लाभ, अन्य दिवानी वाद, चालान और प्ली बार्गेनिंग से जुड़े मामलों का भी समाधान किया जाएगा।

    राष्ट्रीय लोक अदालत की विशेषता यह है कि इसमें न केवल लंबित मामलों का बोझ कम होता है, बल्कि आपसी समझौते से विवाद समाप्त होने के कारण समाज में सौहार्द और विश्वास भी मजबूत होता है।

    जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सक्रियता और सुव्यवस्थित प्रयासों की बदौलत मधेपुरा में न्याय को आम लोगों तक सरल और सुलभ बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल देखने को मिल रही है। यह पहल निश्चित रूप से न्यायिक व्यवस्था को और अधिक जनोन्मुखी बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

    नोट : खबर में फीचर इमेज के रूप में AI जेनरेटेड इमेज का उपयोग किया गया है .

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