पतरघट (सहरसा)। बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ के राज्यव्यापी आह्वान पर बुधवार को तीसरे दिन भी पतरघट प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) इन्द्रदेव कुमार निराला ने काली पट्टी बांधकर अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन किया। यह विरोध प्रदर्शन बिहार बंद के दौरान सारण जिले में ड्यूटी के समय दो बीडीओ पर हुए हमले के विरोध तथा अधिकारियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की मांग को लेकर किया जा रहा है।
बीडीओ इन्द्रदेव कुमार निराला ने कहा कि सरकार द्वारा मांगों पर ठोस एवं सकारात्मक निर्णय लिए जाने तक यह शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि सरकारी अधिकारियों के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और भयमुक्त कार्य वातावरण सुनिश्चित कराना है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपने दायित्वों का निर्वहन बिना किसी भय और दबाव के करने का अधिकार मिलना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि बिहार बंद के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण में तैनात सारण जिले के छपरा सदर की बीडीओ दृष्टि पाठक एवं रिविलगंज के बीडीओ रितेश कुमार प्रदर्शनकारियों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को तेज कर दिया है।
संघ के अनुसार, गंभीर रूप से घायल दृष्टि पाठक का इलाज पटना स्थित आईजीआईएमएस में चल रहा है, जहां उनकी एक आंख की रोशनी प्रभावित होने की सूचना है। वहीं रिविलगंज के बीडीओ रितेश कुमार के सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी सर्जरी की गई है और उनका उपचार जारी है।
इसी घटना के विरोध में राज्यभर के बीडीओ काली पट्टी बांधकर अपने सरकारी दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। पतरघट में भी बीडीओ इन्द्रदेव कुमार निराला लगातार तीसरे दिन काली पट्टी बांधकर कार्यालय पहुंचे और नियमित रूप से कार्यालयीन कार्यों का निष्पादन किया। उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं स्थायी व्यवस्था समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बिहार ग्रामीण विकास सेवा संघ ने राज्य सरकार के समक्ष छह सूत्री मांगें भी रखी हैं। इनमें प्रत्येक प्रखंड कार्यालय में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था एवं आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना, प्रत्येक बीडीओ के साथ प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, ड्यूटी के दौरान घायल अधिकारियों के समुचित एवं निःशुल्क उपचार की व्यवस्था, संवेदनशील विधि-व्यवस्था ड्यूटी में पर्याप्त पुलिस बल की उपलब्धता तथा अधिकारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं स्थायी नीति लागू करना प्रमुख मांगों में शामिल है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।















No comments yet. Be the first to comment!