मधेपुरा/ प्रगतिशील लेखक संघ की मधेपुरा इकाई के जिला सम्मेलन की तैयारी शुरू कर दी गई है।इस संबंध में कार्यक्रम संयोजक युवा साहित्यकार एवं इतिहासकार डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने बताया कि प्रगतिशील लेखक संघ, मधेपुरा के जिला सम्मेलन की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। सम्मेलन को सफल एवं व्यापक स्वरूप देने के लिए संगठन से जुड़े साहित्यकारों, लेखकों एवं साहित्यप्रेमियों के बीच लगातार संपर्क और विचार-विमर्श का दौर शुरू है।

कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर राठौर ने कहा कि जिला सम्मेलन के अवसर पर “समाज एवं साहित्य” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया जाएगा। जिसमें साहित्य की सामाजिक भूमिका, बदलते समय में लेखक की जिम्मेदारी तथा समाज में मानवीय एवं प्रगतिशील मूल्यों को मजबूत करने में साहित्य के योगदान जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श होगा।

डॉक्टर राठौर ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य जिले के साहित्यकारों एवं लेखकों को एक साझा मंच प्रदान करने के साथ-साथ साहित्य और समाज के बीच संवाद को और मजबूत करना है।उन्होंने बताया कि सम्मेलन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लेखक, कवि, साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी शामिल होंगे। प्रगतिशील लेखक संघ, मधेपुरा के जिला सम्मेलन का आयोजन जिला मुख्यालय अंतर्गत सार्क इंटरनेशनल स्कूल परिसर, में दोपहर 1.30 बजे से 3.30 बजे तक आयोजित है ।

आयोजन को लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है तथा अधिक से अधिक साहित्यकारों और साहित्यप्रेमियों की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए संपर्क अभियान चलाया जा रहा है।

कार्यक्रम संयोजक डॉक्टर हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने बताया कि प्रलेस के नाम से चर्चित प्रगतिशील लेखक संघ की स्थापना बीसवीं सदी के चौथे दशक में भारतीय लेखकों और बुद्धिजीवियों का एक ऐतिहासिक साहित्यिक और वैचारिक आंदोलन था। इस संघ का मुख्य उद्देश्य साहित्य को आम जनता के संघर्षों से जोड़ना, सामाजिक-आर्थिक समानता का समर्थन करना और समाज में व्याप्त कुरीतियों, रूढ़िवादिता तथा अंधविश्वास का विरोध करना था। 9-10 अप्रैल 1936 को लखनऊ के ऐतिहासिक ‘रिफ़ाह-ए-आम’ क्लब में प्रगतिशील लेखक संघ का प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ था जिसकी ऐतिहासिक अध्यक्षता महान कथाकार मुंशी प्रेमचंद ने की थी। इस दौरान उन्होंने अपना प्रसिद्ध अध्यक्षीय भाषण दिया।आगे चलकर इस प्रगतिशील आंदोलन ने लगभग सभी भारतीय भाषाओं (विशेषकर हिंदी और उर्दू) के शीर्ष लेखकों और कवियों को एक मंच पर ला खड़ा किया। इससे सज्जाद ज़हीर, मुंशी प्रेमचंद, फैज अहमद फैज, मखदूम मोइनुद्दीन, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, इस्मत चुगताई, अली सरदार जाफ़री, कृशन चंदर, और राजिंदर सिंह बेदी जैसे नाम खास रहे आज भी राष्ट्रीय फलक पर यह साहित्यकारों का सर्वाधिक विश्वस्त और मजबूत संगठन की पहचान रखता है।