सुपौल। कोशी बाढ़ कटाव पीड़ितों के 10 सूत्रीय मांगों को लेकर कोशी नव निर्माण मंच ने सुपौल जिला पदाधिकारी के समक्ष धरना दिया। धरना की कुछ मांगो पर डीएम ने कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया। धरना कार्यक्रम को संबंधित करते हुए कोशी कटाव पीड़ित राजेश मण्डल, अखिलेश, मो रऊफ, सुलेखा देवी, रेखा देवी, इशरत प्रवीण, बेबी समसुन, इत्यादि ने अपनी कटाव की पीड़ा रखते हुए बताया कि कोशी में जीवन नर्क के समान हो गया है घर का सारा समान नदी में भास गया। समान निकालने के लिए नावें नहीं थी बचा खुचा समान लेकर तटबंध के भीतर ही हमलोग पुनः रखकर गुजर कर रहे है पुनः वहां भी मानसून में पानी आयेगा तो हमलोग फिर से न कट जाएं यह संकट है हमलोगों को पुनर्वास नहीं है सरकार बाहर कही बसाये। उसी प्रकार मो सदरूल, गौकरण सुतिहार, प्रीतम मुखिया, प्रिय कुमार, राजेंद्र यादव, रामचंद्र शर्मा, इमामुल, रामचंद्र यादव, उमेश पासवान, नीतीश, परमिला देवी, बादामी देवी, संतोष मुखिया, संजय यादव रामबिलास चौधरी, नुरूल होदा, मो अब्बास, रामानंद राय, अरविंद मेहता, छुटहरू, शिवशंकर मंडल, इत्यादि लोगों ने बाढ़, कटाव की पीड़ा सुनाई। जिला अध्यक्ष आलोक राय ने संगठन का 10 सूत्रीय मांग पत्र लोगों को पढ़कर सुनाया और सभी की सहमति ली सभी के हस्ताक्षर से मांग पत्र तैयार हुआ। घोघररिया की मुखिया एकता यादव, माले नेता डा अमित ने कोशी पीड़ितों की मांगों का समर्थन किया। 10 सूत्रीय मांगपत्र को डीएम को सौंपा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महेन्द्र यादव ने की और संचालन इंद्र नारायण सिंह ने किया। धर्मेन्द्र, मनीष, प्रमोद राम, भीम सदा, जितेन्द्र, बबीता, अर्चना सिंह ने कार्यक्रम की व्यवस्थापन में भूमिका निभाई।

धरना की मांगे : बेला गोठ, बगहा, पंचगछिया, खोखनहा, ढ़ोली, सियानी, पिपराही सहित अन्य सभी गाँवो एक कटाव पीड़ित परिवारों को जिनके पास बसने के पुनर्वास या बाहर जमीन नही है उन्हें तत्काल सरकारी जमीन/ पुनर्वास में बसाया जाए| उनको गृह क्षति का लाभ भी तत्काल दिलाया जाए| पिछले वर्ष की बाढ़ कटाव पीड़ित, लालगंज, सोनवर्षा, बेला गोठ, पंचगछिया, खोखनहा सहित सभी जगह के कटाव पीड़ितों को गृहक्षति का भुगतान हो।

आपदा प्रबन्धन विभाग द्वारा बनाई गयी बाढ़ पीड़ितों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और तय मानदर के मुताबिक कोशी तटबंध के भीतर आये पानी को बाढ़ मानते हुए कार्य किये जाएं| तटबंध के भीतर सर्वे कराकर सभी को पुनर्वासित कराया जाए, अनुबंध पर रखीं गयी नावों की सूची सार्वजनिक किया जाए|अभी भी पहले के कटाव पीड़ित जहाँ बसे हैं वहां रौशनी की व्यवस्था हो,
जिन बसाहटों में सरकारी स्कूल ल, आंगनबाड़ी नहीं हैं वहां स्कूल अंगबाड़ी खोला जाए। निःशुल्क कोशी छात्रावासों की स्थापना करायी जाए, तटबंध के भीतर उप स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना हो और उनका संचालन हो | महिलाओं और बच्चों के लिए नियमित टीकाकरण हो| बाढ़ के समय नौका से मेडिकल टीमें भेजीं जाएँ| कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनः सक्रिय और प्रभावी बनाया जाए ।माफ़ लगान की वसूली पर रोक लगे और भू-सर्वे की प्रक्रिया सरल हो, कोशी तटबंध और स्परों पर बसे लोगों को उजाड़ने के पहले पुनर्वासित किया जाए। पुनर्वास में बसे कोशी के लोगों के होल्डिंग टैक्स से मुक्त किया जाए, कोशी समस्या का वास्तिवक समाधान करते हुए कोशी की सभी छाडन धाराओं को पुनर्जीवित कराने की पहल हो।

डीएम से मिला आश्वासन : डीएम ने मांग पत्र पढ़ते हुए कटाव पीड़ितों को गृह क्षति देने का आश्वासन दिया वहीं पुनर्वास पर अन्य मुद्दों पर भी विचार करने को कहा।