मधेपुरा/ मधेपुरा में स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार (14 मार्च 2026) को एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया (बिहार शाखा) एवं आई.एम.ए. (मधेपुरा शाखा) के संयुक्त तत्वावधान में निरंतर चिकित्सकीय अभियान (CME) के तहत एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम शहर के मीडवे होटल में संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में चिकित्सकों ने भाग लिया।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए ए.एस.आई. बिहार शाखा के अकादमिक काउंसिल के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सिन्हा ने कहा कि वर्तमान समय में आम लोगों के बीच गैस, डकार और मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस विषय पर विस्तृत चर्चा के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
आई.एम.ए. मधेपुरा शाखा के सचिव डॉ. अमित आनंद ने बताया कि गैस और अपच की समस्या अब लगभग हर घर की समस्या बन चुकी है, जिससे लोगों के दैनिक जीवन और कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों के माध्यम से आमजनों को बीमारी के लक्षण, जांच, बचाव और उपचार के बारे में जागरूक किया जा सकता है।
आई.जी.आई.एम.एस., पटना के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं चिकित्सक अधीक्षक डॉ. मनीष मंडल ने ‘फंक्शनल डिस्पेप्सिया’ विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इसे सरल मैथिली भाषा में “मोन केना-केना ने करै छै” बताते हुए इसके लक्षणों में पेट में भारीपन, गैस, अपच, उल्टी जैसा महसूस होना, हल्का दर्द, सिर में भारीपन और शरीर में कमजोरी को शामिल बताया।
उन्होंने कहा कि यह समस्या मुख्य रूप से तनाव, अनियमित खान-पान, मानसिक अस्थिरता और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण उत्पन्न होती है। इसके बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अनुशासित जीवनशैली को आवश्यक बताया।
डॉ. मंडल ने उपचार के बारे में बताते हुए कहा कि प्रोकाइनेटिक दवाओं के साथ प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक का उपयोग प्रभावी होता है। साथ ही आवश्यकता अनुसार तनाव कम करने और नींद सुधारने वाली दवाओं के प्रयोग से मरीज दो से तीन महीने में स्वस्थ हो सकता है।
वहीं आई.जी.आई.एम.एस., पटना के सर्जिकल गैस्ट्रो विभाग के अपर प्राध्यापक डॉ. साकेत कुमार ने मोटापे के शल्य चिकित्सा उपचार पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बैरिएट्रिक सर्जरी आज के समय में एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है। इस प्रक्रिया में दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक तकनीक) से पेट की थैली को छोटा कर पाचन प्रक्रिया में बदलाव किया जाता है, जिससे तेजी से वजन कम होने लगता है। इस तकनीक को ‘स्लीव गैस्ट्रेक्टॉमी’ कहा जाता है।
कार्यक्रम का उद्घाटन आई.एम.ए. बिहार शाखा के अध्यक्ष डॉ. धीरेंद्र कुमार यादव एवं ए.एस.आई. बिहार शाखा के अकादमिक काउंसिल अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से किया।
डॉ. धीरेंद्र यादव ने कहा कि डॉ. मनीष मंडल जैसे विशेषज्ञ के मधेपुरा आगमन से यहां के चिकित्सकों का ज्ञानवर्धन होगा और स्थानीय मरीजों को भी बेहतर चिकित्सा परामर्श मिल सकेगा। वहीं डॉ. सिन्हा ने डॉ. मनीष मंडल की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाकर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।
संगोष्ठी में डॉ. एस.एन. यादव, डॉ. मिथिलेश कुमार, डॉ. यू.के. राजा, डॉ. राजेंद्र गुप्ता, डॉ. नृपेंद्र कुमार सिंह, डॉ. सरोज सिंह, डॉ. पी. टुटी, डॉ. दिलीप कुमार सिंह, डॉ. एल.के. लक्ष्मण, डॉ. आलोक निरंजन, डॉ. वरुण कुमार, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. ओम नारायण यादव, डॉ. अंजनी कुमार, डॉ. पी. भास्कर, डॉ. अलका सिंह, डॉ. नायडू कुमारी सहित सुधांशु कुमार एवं कई अन्य गणमान्य चिकित्सक उपस्थित रहे।














