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  • अंगिका भाषा को संरक्षित और समृद्ध के लिए पटना में होगा तीन दिवसीय महोत्सव

    मधेपुरा प्रतिनिधि भाषा और संस्कृति के विकास में सबसे बड़ा योगदान समाज का होता है। वहीं राजनीतिक संरक्षण से भाषा और संस्कृति संरक्षित और समृद्ध होती है। अन्य भाषा व संस्कृति की ही तरह अंगिका भाषा एवं अंग क्षेत्र की अपनी सांस्कृतिक पहचान है। यहां की लोक संस्कृति एवं लोक नृत्य को जिंदा रखना बहुत


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    मधेपुरा प्रतिनिधि
    भाषा और संस्कृति के विकास में सबसे बड़ा योगदान समाज का होता है। वहीं राजनीतिक संरक्षण से भाषा और संस्कृति संरक्षित और समृद्ध होती है। अन्य भाषा व संस्कृति की ही तरह अंगिका भाषा एवं अंग क्षेत्र की अपनी सांस्कृतिक पहचान है। यहां की लोक संस्कृति एवं लोक नृत्य को जिंदा रखना बहुत जरूरी है। इसी बावत अंगिका भाषा को समृद्धि देने एवं अंग की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने को लेकर पटना की धरती पर पहली बार 28 अक्टूबर 2023 से तीन दिवसीय अंग अंगिका महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई।
    उक्त बातें आयोजन समिति के कार्यक्रम संयोजक सह साहित्यकार संजय कुमार सुमन ने कही।उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत के सोलह महा जनपदों में एक- अंग महा जनपद का प्रमुख स्थान है। अंग जनपद में बोली जाने वाली भाषा अंगिका है। जो वर्तमान समय में राजनैतिक उपेक्षा का शिकार है। बिहार, झारखंड, प० बंगाल और नेपाल जैसे विस्तृत भू-भाग में बोली जाने वाली अंगिका को भाषा की अष्टम सूची में सम्मिलित न करना करोड़ों अंगिका भाषियों का अपमान है। इन्ही सब मुद्दों को लेकर पटना में 28 अक्टूबर 23 से तीन दिवसीय अंग अंगिका महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई।


    आयोजन समिति के सचिव डॉ. विभुरंजन ने कहा कि पटना में आयोजित होने वाले अंग अंगिका महोत्सव कई मायनों में खास यादगार बनेगा। अंगिका की दिशा और दशा पर मंथन के साथ-साथ अंंग प्रदेश की कला, साहित्य एवं सांस्कृतिक झलकियाँ प्रस्तुत होंगी। इस मौके पर अंगिका के उद्भव, विकास,लोक संस्कृति,धार्मिक क्षेत्र, सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए एक भव्य स्मारिका का भी प्रकाशन किया जाएगा। अंगिका महोत्सव की खासियत यह होगी कि इसमें सभी कार्यक्रम अंगिका भाषा में आयोजित एवं स्मारिका का प्रकाशन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में अंग क्षेत्र के चुनिंदा लाेक कलाकार वादन, गायन, नृत्य, अभिनय और काव्य प्रस्तुति के जरिए अंगिका भाषा की पहचान बनाए रखने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा कार्यक्रम में क्षेत्र की संस्कृति पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा ताकि युवा अपनी भाषा के प्रति संजीदा हो सकें।

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