मधेपुरा/ विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार की शाम जिला प्रशासन की ओर से कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च के जरिए वर्ष 1947 के भारत विभाजन के दौरान प्रभावित लोगों की पीड़ा, संघर्ष और बलिदान को याद किया गया। साथ ही लोगों को शांति, एकता, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया गया। कैंडल मार्च समाहरणालय परिसर से शुरू होकर बीपी मंडल चौक तक पहुंचा।

कैंडल मार्च में जिले की प्रभारी मंत्री शीला मंडल, जिला पदाधिकारी अभिषेक रंजन, एसपी संदीप सिंह, एडीएम अरुण कुमार सिंह, कला संस्कृति पदाधिकारी आम्रपाली, जदयू जिलाध्यक्ष गुड्डी देवी, समाजसेवी डॉ. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी, शौकत अली समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम लोग शामिल हुए। सभी ने हाथों में जलती मोमबत्तियां लेकर विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी।

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि विभाजन का दौर भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसने लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित किया। बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा। परिवार बिछड़ गए और हिंसा के कारण असंख्य लोगों को जान गंवानी पड़ी। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य उस पीड़ा को याद करने के साथ ही आने वाली पीढ़ियों को इतिहास के इस दुखद अध्याय से अवगत कराना है।

कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने आपसी भाईचारा, सामाजिक एकता और सौहार्द बनाए रखने का संदेश दिया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि देश की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। समाज में शांति और सद्भाव कायम रखने के लिए सभी वर्गों को मिलकर काम करना चाहिए। विभाजन की त्रासदी से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न नहीं होने देने का संकल्प भी लिया गया।

समाहरणालय से बीपी मंडल चौक तक निकले मार्च के दौरान लोगों में देशभक्ति और एकता की भावना दिखाई दी। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि इतिहास की पीड़ा को याद करते हुए वर्तमान और भविष्य में समाज को एकजुट, शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।