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  • बाबा बाणेश्वर महोत्सव सम्पन्न, ‘उगना वियोग’ भाव नृत्य के जरिए दर्शक हुए भावविभोर

    सहरसा/ राज्यकीय बाबा बाणेश्वर महोत्सव देवना सहरसा में सम्पन्न हो गया। लोकगायिका रंजना झा सहित कई नामचीन कलाकारों ने गीता संगीत और नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति से दिल जीत लिया। इसी कड़ी में दूरदर्शन केन्द्र से लोकनृत्य के क्षेत्र में ग्रेड प्राप्त कलाकार संह ‘सृजन दर्पण’ के निर्देशक बिकास कुमार एवं टीम को भी आमंत्रित


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    सहरसा/ राज्यकीय बाबा बाणेश्वर महोत्सव देवना सहरसा में सम्पन्न हो गया। लोकगायिका रंजना झा सहित कई नामचीन कलाकारों ने गीता संगीत और नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति से दिल जीत लिया। इसी कड़ी में दूरदर्शन केन्द्र से लोकनृत्य के क्षेत्र में ग्रेड प्राप्त कलाकार संह ‘सृजन दर्पण’ के निर्देशक बिकास कुमार एवं टीम को भी आमंत्रित किया गया था। जिसमें रंगकर्मी विकास कुमार टीम ने महाकवि विद्यापति की रचना उगना रे मोर कते गले ‘उगना वियोग’ भाव नृत्य के जरिए से संदेश मूलक प्रस्तुति दी।

    महोत्सव में मौजूद विधायक डॉ. आलोक कुमार रंजन,  आयुक्त नीलम चौधरी, डीआईजी मनोज कुमार, डीएम वैभव चौधरी, एसपी हिमांशु , एडीएम ज्योति कुमार, एसडीओ प्रतिप कुमार झा आदि ने भाव नृत्य उगना वियोग की सहरणा किये। कलाकारों ने भाव नृत्य के माध्यम से यह दिखाने का प्रयास किया कि महाकवि विद्यापति भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उनकी भक्ति भावना से प्रसन्न होकर भगवान शिव स्वयं उनके घर पर उगना के भेष में सेवक का काम करते थे। यह बात सिर्फ विद्यापति जानते थे। उगना का शर्त यह था कि यह बात किसी को बताना नहीं है।जिस दिन बताओगे उसी दिन मैं चला जाऊंगा।इस बात से विद्यापति की पत्नी भी अनजान थी। एक दिन विद्यापति की पत्नी किसी बात पर क्रोधित होकर चूल्हा की जलती लकड़ी से मारने दौड़ी। 

    ऐसा अनर्थ होता देख विद्यापति खुद को रोक नहीं पाए,बोल उठे-हां हां ई साक्षात महादेव छीये। और फिर शर्त के अनुसार शिव अंतर्धान हो गए। हर वक्त साथ-साथ रहने वाले महदेव के यूं चले जाने से विद्यापति का हृदय विकल हो उठा।

    उसी हृदयविदारक वेदना को रंग निर्देशक विकास कुमार ने अपने जीवंत अभिनय से मंच पर दिखाने का प्रयास किया। इसमें उन्होंने भारतीय लोक मानस में आदि काल से जमे विश्वास को मूर्त रूप संदेश मूलक मंचन के माध्यम से दिया।नृत्य- नाटक के जरिए कलाकारों ने यह संदेश दिया कि सच्चे हृदय की पुकार पर भगवान भी स्वयं भक्त के पास हाजिर हो जाते हैं, विद्यापति की कर्ता पुकार पर जब आदि देव भगवान शंकर मंच पर अवतरित हुए तब दर्शक वर्ग कलाकारों के बेहतरीन अभिनय देख कर भाव विभोर हो गए।

    महाकवि विद्यापति की जीवंत भूमिका में    रंग निर्देशक और दूरदर्शन से ग्रेड प्राप्त कलाकार विकास कुमार,   उगना का किरदार युवा रंगकर्मी निखिल यदुवंशी ने निभाया। जबकि सहयोगी कलाकार मनिषा कुमारी और मौसम कुमारी थी ।  मौजूद दशकों ने संदेशप्रद प्रस्तुति देखा कर मंत्रमुग्ध हो गये। बीच-बीच में लोगों ने रंगकर्मियों के बेहतरीन अभिनय को तालियों के गड़गाहट से खूब तारीफ किया।

    मंच संचालन प्रोफेसर अर्चना कुमारी ने किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीण मौजूद थे।

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