मधेपुरा/ जिला मुख्यालय स्थित आरआर ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्कूल, मधेपुरा में मधेपुरा पुलिस द्वारा बच्चों एवं युवाओं के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक (एसपी) संदीप सिंह, एएसपी प्रवेन्द्र भारती, मधेपुरा सदर थानाध्यक्ष विमलेन्दु उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान एसपी संदीप सिंह ने बच्चों से संवाद करते हुए मोबाइल के सुरक्षित उपयोग, साइबर ठगी, साइबरठगी , सोशल मीडिया के दुरुपयोग और अफवाहों से बचने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बच्चों को बताया कि पुलिस आपकी मित्र है और किसी भी प्रकार की समस्या या संदेह होने पर बिना झिझक पुलिस से संपर्क करना चाहिए।
एसपी संदीप सिंह ने तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” जैसे साइबर फ्रॉड के प्रति बच्चों को सचेत करते हुए कहा कि इस प्रकार की कॉल पूरी तरह फर्जी होती हैं। ऐसे मामलों में घबराने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचना देना चाहिए। साथ ही उन्होंने ऑनलाइन गेमिंग में पैसे लगाने और प्रलोभन के कारण परिवार को होने वाले आर्थिक नुकसान से भी बच्चों को आगाह किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने यूपीएससी, आईएएस-आईपीएस बनने की तैयारी से जुड़े प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर देते हुए एसपी संदीप सिंह ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और नियमित अध्ययन, करंट अफेयर्स तथा ईमानदार प्रयास पर जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि आईएएस-आईपीएस बनना हर योग्य विद्यार्थी का अधिकार है।
इस अवसर पर एएसपी प्रवेन्द्र भारती ने भी बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पुलिस से डरने की आवश्यकता नहीं है, पुलिस आपकी साथी है और हर समय आपकी मदद के लिए तैयार है। वहीं मधेपुरा सदर थाना के SHO विमलेन्दु ने कहा कि किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर बच्चे उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं, पुलिस पूरी जिम्मेदारी के साथ सहायता करेगी।
आरआर ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंध निदेशक राजेश कुमार राजू ने मधेपुरा पुलिस की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह बच्चों के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम है, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे गलत रास्ते पर जाने से बचेंगे। स्कूल प्रशासन ऐसे कार्यक्रमों से अत्यंत उत्साहित है।
कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य राकेश रंजन सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित रहे। बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे, जिनका पुलिस अधिकारियों ने सरल एवं प्रभावी ढंग से उत्तर दिया। यह पहल निश्चित रूप से बच्चों और पुलिस के बीच सकारात्मक संबंध स्थापित करेगी तथा समाज में जागरूकता और सुरक्षा की भावना को मजबूत करेगी।














