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  • कोर्ट में ससमय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने पर डीएम को शोकॉज

    मधेपुरा। पत्नी की हत्या से जुड़े एक मामले में अभियोजन पक्ष से समय पर कोई भी गवाह कोर्ट में प्रस्तुत नहीं करने से नाराज एडीजे टू की कोर्ट ने डीएम को शोकॉज किया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इस भूल के लिए क्यों नहीं पांच हजार रुपया बतौर जुर्माना डीएम


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    मधेपुरा। पत्नी की हत्या से जुड़े एक मामले में अभियोजन पक्ष से समय पर कोई भी गवाह कोर्ट में प्रस्तुत नहीं करने से नाराज एडीजे टू की कोर्ट ने डीएम को शोकॉज किया है। साथ ही कोर्ट ने यह भी पूछा है कि इस भूल के लिए क्यों नहीं पांच हजार रुपया बतौर जुर्माना डीएम के वेतन से काट लिया जाए। मामला हत्या से संबंधित सत्रवाद संख्या 264/2022 से जुड़ा है। ससमय गवाहों को प्रस्तुत नहीं करने से तीन साल से जेल मे बंद उदाकिशुनगंज निवासी मुकेश चौरसिया को बेल नहीं मिल रही है। बचाव पक्ष की ओर से बहस कर रहे अधिवक्ता संजीव कुमार ने बताया कि उदाकिशुनगंज निवासी मुकेश चौरसिया 17 दिसंबर 2021 से ही अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में जेल मे बंद है। मुकेश के खिलाफ उदाकिशुनगंज थाना में दहेज़ हत्या सहित साक्ष्य छुपाने से संबंधित केस दर्ज है। अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जाने के कारण सत्रवाद संख्या 264/2022 एडीजे (2) सतीश कुमार की कोर्ट में लंबित चल रहा है। एडीजे सतीश कुमार टू की कोर्ट ने कहा कि जिले में अभियोजन के आला अधिकारी (डीएम) होते हैं। अभियोजन से कोर्ट में समय पर साक्ष्य प्रस्तुत करवाने की जिम्मेवारी जिलाधिकारी की है।

    गवाह व साक्ष्य को कोर्ट में पेश करने का दो बार दिया गया था आदेश :

    बचाव पक्ष के अधिवक्ता संजीव कुमार ने बताया कि हाई कोर्ट का सख्त निर्देश है कि किसी भी मामले में कोर्ट से जारी आदेश और तिथि को अभियोजन द्वारा समुचित साक्ष्य को ससमय कोर्ट में प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। बावजूद अभियोजन की ओर से साक्ष्य को कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है। इस केस में कोर्ट ने 1 अगस्त 2024 और 23 अगस्त 2024 को पत्र भेज कर अभियोजन को उक्त तिथि को गवाह और साक्ष्य कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया था लेकिन अभियोजन द्वारा हाई कोर्ट के आदेश को पूरा नहीं किया गया। अधिवक्ता श्री कुमार ने बताया कि पत्नी की हत्या के आरोप में तीन साल से जेल बंद आरोपी की जमानत अर्जी पर हाई कोर्ट ने संज्ञान लेते जिला कोर्ट को संबंधित केस में स्पीडी ट्रायल चला कर एक साल के अंदर निष्पादन करने को कहा था। इसके लिए कोर्ट ने अभियोजन को ससमय कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत करने का आदेश जारी किया था।

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