मधेपुरा/सावधान! अगर आप मधेपुरा में पत्रकारिता करते हैं और पुलिस प्रशासन के मनमाफिक खबर नहीं प्रकाशित करते हैं, तो ये दोनों मिलकर आपको जेल भेजने का षड़यंत्र कर सकती है। पुलिस और प्रशासन एकजुट होकर खोद-खोद कर आपके खिलाफ कार्रवाई करेगी। ऐसी ही एक जबरिया कार्रवाई का मामल इन दिनों मधेपुरा गर्म है। आमजन में चर्चा है कि अगर पत्रकारों को ही इस तरह से टारगेट कर प्रताड़ित किया जाएगा, तो आमजन की आवाज को कौन बुलंद करेगा। कौन पुलिस और प्रशासनिक पदाधिकारियों के भ्रष्टाचार को उजागर करेगा।
यह है पुलिसिया कार्रवाई : निष्पक्ष रूप से बिहार के मधेपुरा जिले से खबर जारी करने वाले कोसी टाइम्स बिहार के पत्रकार अफजल राज और और उसके संपादक प्रशांत कुमार को मोरली डाउन करने की नीयत से पुलिस और प्रशासन ने मिलकर कई सारी कार्रवाई की है। स्मैक तस्करों से परेशान ग्रामीणों की आवाज को बुलंद करने पर मामले की जांच कराकर दोषी पदाधिकारी पर कार्रवाई करने के बजाए कोसी टाइम्स के पत्रकारों पर ही भ्रामक खबर चलाने का आरोप लगाकर मधेपुरा साइबर थाना में केस दर्ज करा दिया गया। इससे भी जी नहीं भरा तो पुरैनी निवासी पत्रकार अफजल राज के एक पुराने वीडियो को दरभंगा/मधुबनी के फेसबुक संचालक से वायरल कराकर केस में जोड़ दिया गया, ताकि केस भारी भरकम हो जाए।
अब देखिए प्रशासनिक कार्रवाई : पिछले दिनों सदर SDM के नाम पर एक दलाल अकारण सील कर दिए गए गम्हरिया के एक खाद बीज दुकान को खुलवाने के लिए डेढ़ लाख रुपए की डिमांड कर रहा था। कोसी टाइम्स ने जब मामले की पड़ताल शुरू को तो उसी शाम को दुकान का सील खुलवा दिया गया और खबर नहीं चलाने की बात कही जाने लगी। लेकिन जब कोसी टाइम्स पर इस मामले में दो दो खबर प्रकाशित हुई तो प्रशासन ने पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। उनसे जुड़े एक रेस्टोरेंट में SDM संतोष कुमार ने 25 मार्च की रात 10 बजे छापा मारा । कुछ नहीं मिला तो खाली पड़े कॉमर्शियल सिलेंडर को एक कमरे में रखवाकर सील कर दिया गया। उन्हें जब पता चला कि पत्रकारों का मनोबल नहीं टूटा है तो अगली सुबह नगर परिषद के अधिकारियों को भेज कर कूल मुन रेस्टोरेंट को ही विभिन्न आरोप लगाकर सील कर दिया गया, जबकि इन आरोपों में नोटिस देकर पहले जुर्माना लेना चाहिए। लेकिन, नहीं हाकिम के खिलाफ खबर चली है तो कार्रवाई टॉप लेवल की ही होगी। सवाल यह कि क्या मधेपुरा शहर के सभी होटलों, रेस्टोरेंटों की जांच पूरी हो चुकी है, जो शहर के आखिर छोड़ पर चलाए जा रहे पत्रकार के रेस्टोरेंट पर कार्रवाई कर दी गई।
प्रशासन की खिलाफत करने पर पहले भी एक संवेदक को किया जा चुका है प्रताड़ित : मधेपुरा शहर में ऐसी चर्चा है कि चार साल पहले एक जिलाधिकारी ने एक संवेदक को मजा चखाया था। मामला यह था कि उक्त संवेदक पहले मधेपुरा कलेक्ट्रेट के नाक के बाल थे। एक मामले में संवेदक ने मुंह खोलने के प्रयास किया तो उसके रेस्टोरेंट पर भी इसी तरह की कार्रवाई को अंजाम दिया गया।














