मधेपुरा, बबलू कुमार | बिहार के शासन और प्रशासन में राजा और प्रजा के बीच का अंतर साफ दीखता नज़र आ रहा है| भले लोकतंत्र में जनता को मालिक कहा जाता हो लेकिन हकीकत तो मधेपुरा में सामने आयी | यहाँ CM के लिए रातो-रात प्रशासन ने वार्ड नंबर 4 में कई पक्का निर्माण को तोड़ दिया और कई हरे वृक्ष को काट दिया लेकिन 16 साल से न्यायालय आदेश के बाद भी अपने जमीन से अतिक्रमण खाली कराने के लिए एक पान दुकानदार भटक रहा है |

जी हाँ, समृधि यात्रा के क्रम में सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभी मधेपुरा में प्रवास पर हैं | इस दौरान उन्हें नवनिर्मित पुलिस लाइन भवन का उद्घाटन करना था इसके लिए रातों रात पुलिस लाइन जाने वाली सड़क में अतिक्रमण के नाम पर कई पक्के निर्माण को न सिर्फ तोड़ दिया गया बल्कि कई बड़े-बड़े हरे वृक्षों को काट दिया गया| लेकिन 16 साल से एक गरीब पान विक्रेता को DCLR न्यायालय से मिले आदेश के बाबजूद उनकी जमीन पर कब्ज़ा नहीं दिलाया जा सका है | वो भी तब जब उनके द्वारा जमीन खाली कराने के लिए पुलिस और मजिस्ट्रेट का एक दिन का वेतन भी 15 साल पहले जमा कराया जा चूका है | इस दौरान विभिन्न कार्यालयों से आधा दर्जन से अधिक आदेश पत्र जारी हो चुके हैं | पीड़ित देव नारायण यादव अपनी बात रखने के लिए CM के जनसंवाद स्थल भी गए लेकिन सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें सभा स्थल तक जाने ही नहीं दिया गया |

क्या है मामला ?
शहर के वार्ड नम्बर 14 निवासी देव नारायण यादव और सुधीर यादव दोनों भाइयों ने शहर में रहने के उद्देश्य से अपनी पत्नी के नाम से वर्ष 2009 में 15 धूर जमीन ख़रीदी | लेकिन इसमें से उनके कब्जे में सिर्फ 9 धूर 16 धुरकी जमीन आयी | ये लोग बची हुई जमीन पर कब्ज़ा दिलाने के लिए SDM मधेपुरा को आवेदन दिए | तत्कालीन SDM, IAS गोपाल मीणा ने मामले को बीएलडीआर में DCLR कोर्ट को भेज दिया | माननीय DCLR ने परिवाद संख्या 24/2010 के माध्यम से सुनवाई शुरू की जमीन की मापी करायी गई, मापी में पूरब भाग से महेश्वरी यादव द्वारा 3 धुर 9 धुरकी और सिकेंदर यादव द्वारा 1 धूर 15 धुरकी जमीन पर अबैध कब्ज़ा पाया गया | जिसे हटाने का आदेश 23/12/2010 को अंचल अधिकारी और थाना अध्यक्ष मधेपुरा को दिया गया | इसके लिए देवनारायण यादव ने 11 फ़रवरी 2011 को पुलिस और दंडाधिकारी का शुल्क भी जमा किया लेकिन आज तक जमीन खाली नहीं करायी गयी | वर्ष 2013 में IAS गोपाल मीणा डीएम बन कर मधेपुरा आ गए | पीड़ित फिर उनके जनता दरवार गए और उनके SDM रहते दिए गए आदेश की उन्हें याद दिलायी | इस बार जिलाधिकारी की हैसियत से उन्होंने कार्रवाई का आदेश दिया | पर अपने इस कार्यकाल में भी वे जमीन से अतिक्रमण नहीं हटा पाये | लोग कच्चे मकान से पक्का मकान बना दिये, अधिकारी कहते रहे सब टूट जाएगा, लेकिन ये उनकी जुवानी खर्च से अधिक कुछ नहीं थी | कार्यालयों के चक्कर में पान की दुकान बंद रहने लगी, ग्राहक टूटने लगे, परिवार आर्थिक संकट में फसने लगा, परिवार के भरण पोषण पर अब इस कार्यालयों का चक्कर भारी पड़ने लगा | लेकिन समय-समय पर वे अधिकारीयों को अपना दायित्वा याद दिलाते रहे | अब जब उप-मुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने नए दावे किये और गोपाल मीणा फिर से जिले के प्रभारी सचिव बने तो देवनारायण यादव और उसके परिवार को फिर से आशा जगी है |

देवनारायण यादव ने बीते 16 फ़रवरी को एक बार फिर से जिला अधिकारी के जनता दरवार में आवेदन दिया है | जिसपर डीएम ने मामले की जाँच कर कारवाई का आदेश 18 फ़रवरी को SDM और DCLR को दिया, लेकिन आदेश के 25 दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है | ऐसे में सवाल उठता है क्या न्याय सिर्फ कागजों पर होगा ?














