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  • मधेपुरा मेडिकल कॉलेज में 6 दिनों से बिजली गायब,डीजी के सहारे चल रहा इमरजेंसी, आईसीयू सेवा भी प्रभावित

    मधेपुरा/ जन नायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कालेज अस्पताल में छठे दिन भी बिजली सेवा ठप रही। अब भी दो डीजी के सहारे इमरजेंसी और अन्य वार्डों में बिजली दी जा रही है। लेकिन बिजली की सुचारू व्यवस्था नहीं होने से मेडिकल कालेज अस्पताल में चिकित्सा सेवा प्रभावित हो रहा है। 29 जुलाई को गायब हुई


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    मधेपुरा/ जन नायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कालेज अस्पताल में छठे दिन भी बिजली सेवा ठप रही। अब भी दो डीजी के सहारे इमरजेंसी और अन्य वार्डों में बिजली दी जा रही है। लेकिन बिजली की सुचारू व्यवस्था नहीं होने से मेडिकल कालेज अस्पताल में चिकित्सा सेवा प्रभावित हो रहा है।

    29 जुलाई को गायब हुई थी बिजली : मेडिकल कालेज सूत्रों की माने तो एबीबी कंपनी द्वारा मेडिकल कालेज में किए गए बिजली वायरिंग में फॉल्ट आ जाने के कारण बिजली गायब हो गई थी। जिसके बाद मेडिकल कालेज अस्पताल की व्यवस्था 3 डीजी के सहारे चल रही थी। लेकिन 31 जुलाई की रात मेडिकल कालेज अस्पताल का तीनों डीजी बैठ गया। इसके बाद शाम 7 बजे से रात करीब 2 बजे तक पूरा मेडिकल कालेज अंधेरे में डूबा रहा। बाद में जिला पदाधिकारी के पहल पर निजी टेंट हाउस के तीन डीजी के सहारे मेडिकल कालेज के कुछ हिस्से में बिजली सेवा बहाल किया गया।

    5 दिन में फूंक गया 5 लाख का डीजल : 

    मेडिकल कालेज के कुछ हिस्सों में बिजली सेवा बहाल करने के लिए दो डीजी जिसकी क्षमता 1500 केवी बताया जा रहा के द्वारा बिजली दिया जा रहा है। बताया जा रहा है यह प्रतिदिन करीब एक लाख का डीजल पी रही है।

    निजी अस्पतालों की चांदी : मेडिकल कालेज बन जाने के कारण कोशी और सीमांचल के गरीब मरीजों को काफी राहत मिली थी। लेकिन बिजली सेवा ठप होने की वजह से स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हुआ है। एन आई सी यू में बच्चों को भर्ती नही लिया जा रहा। वही आईसीयू आदि जरूरत वाले जगहों पर एसी की भी व्यस्था नहीं होने के कारण मरीज वहां से बाहर निजी अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर हैं।

    मधेपुरा सदर अस्पताल का आईसीयू और एन आई सी यू भी फुल : मधेपुरा मेडिकल कालेज के बाद मधेपुरा सदर अस्पताल में आईसीयू और एन आई सी यू की व्यवस्था है। लेकिन मेडिकल कालेज में यह व्यवस्था लगभग ठप्प होने से सदर अस्पताल पर लोड बढ़ गया है। इतना ही नहीं जिस निजी अस्पतालों में मेडिकल कालेज खुलने के बाद लगभग ताला लटक गया था वहां अब चहल पहल बढ़ गई है।

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