बबलू यादव / मधेपुरा हालिया दिनों में चोरों का मनोबल इस कदर आसमान पर है कि कानून का डर तो पहले से ही नहीं था अब भगवान का भी डर खत्म हो चूका है। सदर थाना अंतर्गत साहूगढ़ के वार्ड 15 स्थित बड़ी दुर्गा स्थान को एक बार फिर चोरों ने अपना निशाना बनाया है। यहाँ रखे हुए दान पेटी को काटकर दान के रुपये और सोना – चांदी के जेवरात पर हाथ साफ कर दिया है। हैरानी की बात यह है कि यह कोई पहली या दूसरी वारदात नहीं, बल्कि तीसरी बार मंदिर में चोरी हुई है—और हर बार की तरह इस बार भी सवाल वही पुराने हैं, जवाब नदारद।
रात के अंधेरे में बेखौफ चोरों ने मंदिर परिसर में घुसकर इत्मीनान से दान पेटी काटी और आराम से फरार हो गए। सुबह जब ग्रामीणों को घटना की जानकारी मिली तो इलाके में आक्रोश और नाराजगी फैल गई। लोगों का कहना है कि बार-बार चोरी के बावजूद न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हुए, न ही पहले की घटनाओं का खुलासा। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर चोरों को इतनी छूट किसने दे रखी है?
सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में जुटने की औपचारिकता निभाई। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि जांच हर बार होती है, नतीजा कभी नहीं आता। सीसीटीवी, गश्ती और सुरक्षा के दावे कागजों में मजबूत हैं, जमीन पर कमजोर।
मंदिर जैसे पवित्र स्थल में बार-बार हो रही चोरी ने पुलिसिया व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि इस बार जांच सिर्फ फाइलों तक सिमटती है या सच में चोरों तक पहुंचती है। फिलहाल, मधेपुरा में संदेश साफ है कि चोर निडर हैं, आस्था असुरक्षित है।














