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  • सहरसा लॉ कॉलेज पांच साल से बंद, कुलपति ने सरकार से की पुनः संचालन की मांग

    विकास कुमार/ सहरसा/ सहरसा स्थित रवि नंदन मिश्र स्मारक विधि महाविद्यालय पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा है। वर्ष 2020 से यहां नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से ठप है, जिससे कोसी क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राएं विधि शिक्षा से वंचित हैं। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिंदु शेखर झा ने कॉलेज को पुनः चालू


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    विकास कुमार/ सहरसा/ सहरसा स्थित रवि नंदन मिश्र स्मारक विधि महाविद्यालय पिछले पांच वर्षों से बंद पड़ा है। वर्ष 2020 से यहां नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह से ठप है, जिससे कोसी क्षेत्र के सैकड़ों छात्र-छात्राएं विधि शिक्षा से वंचित हैं। भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिंदु शेखर झा ने कॉलेज को पुनः चालू कराने के लिए राज्य सरकार से पहल करने की अपील की है। कुलपति ने बिहार सरकार को पत्र भेजकर 14 एलएलएम डिग्रीधारी शिक्षकों के पद सृजन, स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति और आवश्यक अवसंरचना विकास की मांग की है। विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य प्रमोद कुमार ने बताया कि कुलपति की ओर से यह प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है।

    पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने की थी स्थापना :- इस विधि महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1971 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. डॉ. जगन्नाथ मिश्रा ने की थी। बाद में 1981 में इसे सरकारी अंगीभूत घोषित किया गया। एक समय यहां एलएलबी (तीन वर्षीय) पाठ्यक्रम के तहत पार्ट-1, पार्ट-2 और पार्ट-3 में मिलाकर लगभग 400 छात्र अध्ययन करते थे। लेकिन समय के साथ संसाधनों और शिक्षकों की कमी के कारण महाविद्यालय की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। वर्तमान में कॉलेज में केवल एक प्रधान सहायक कार्यरत हैं, जबकि सुचारू संचालन के लिए कम से कम 14 एलएलएम शिक्षक, क्लर्क, लाइब्रेरियन और तृतीय श्रेणी कर्मियों की आवश्यकता बताई गई है।

    बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने लगाई थी रोक :- वर्ष 2020 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की निरीक्षण टीम ने कॉलेज की स्थिति का जायजा लिया था। जांच में पाया गया कि संस्थान में स्थायी शिक्षक नहीं हैं और छात्र-छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं, जैसे गर्ल्स कॉमन रूम, बॉयज कॉमन रूम और पर्याप्त क्लासरूम उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर बार काउंसिल ने कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। अंशकालिक व्याख्याताओं के माध्यम से शिक्षण कार्य जारी रखने के विश्वविद्यालय प्रस्ताव को भी बार काउंसिल ने अस्वीकार कर दिया था।

    सरकारी हस्तक्षेप से ही खुलेगी राह :- सिंडिकेट सदस्य प्रमोद कुमार ने कहा कि अब सरकार द्वारा नए पदों का सृजन और शिक्षकों की नियुक्ति ही एकमात्र विकल्प बचा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सरकार शीघ्र निर्णय लेती है तो सहरसा का यह ऐतिहासिक लॉ कॉलेज फिर से जीवंत होगा और कोसी क्षेत्र के युवाओं के वकालत के सपनों को नई उड़ान मिलेगी।

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