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  • ललित कला क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए श्रीलंका की पिंकी कुमारी साहू होंगी सम्मानित

    भागलपुर प्रतिनिधि महिलाओं के अधिकार, गरिमा और समाज में उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से अंग प्रदेश, भागलपुर (बिहार) में आगामी 24 अगस्त 2025 को भव्य “अंग महिला सम्मान समारोह” का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम अंग क्षेत्र की महान नारियों की स्मृति को समर्पित है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने


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    भागलपुर प्रतिनिधि

    महिलाओं के अधिकार, गरिमा और समाज में उनके योगदान को सम्मान देने के उद्देश्य से अंग प्रदेश, भागलपुर (बिहार) में आगामी 24 अगस्त 2025 को भव्य “अंग महिला सम्मान समारोह” का आयोजन किया जाएगा। यह कार्यक्रम अंग क्षेत्र की महान नारियों की स्मृति को समर्पित है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर श्रीलंका में रह रही पिंकी कुमारी साहू को ललितकला क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

    मालूम हो कि पिंकी कुमारी साहू परवत्ता में जन्मी और शांति निकेतन से कला की पढ़ाई कर अपनी सृजनशीलता का विकास करती आ रही हैं। अब वे श्रीलंका में रहती हैं और वहीं अपनी कला को विस्तार दे रही हैं। ललित कला के क्षेत्र में उनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान कायम हो गई हैं। अभी हाल ही में पटना में बिहार के कला और संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित विश्व स्तर की प्रदर्शनी में उनकी कला कृतियों का प्रदर्शन किया गया। उनकी कला को खूब सराहना मिली। वे स्वयं अपने बारे में पिंकी कहती हैं कि
    अपनी कला यात्रा के बारे में, मुझे हमेशा लगता है कि मैं एक विद्यार्थी हूँ और मुझे और अधिक सीखना है क्योंकि रचनात्मकता को हर पल कुछ नया चाहिए होता है जो हमारे जीवन का हिस्सा है। मेरा जन्म बिहार के भागलपुर ज़िले में हुआ है और मेरे गाँव का नाम साहू परबत्ता है। मेरे पूर्वजों की जड़ें भारत के कई हिस्सों में फैली हुई हैं, इसलिए हमारे पारिवारिक रीति-रिवाज़ बिहार से थोड़े अलग हैं, लेकिन स्थानीय संस्कृति से मेल खाते हैं। हम किसान हैं और हमने अपनी सभ्यता को पोषित करने के लिए खेती करना सीखा है।
    खाना नहीं तो ज़िंदगी नहीं और मेरी कलाकृतियाँ भी उसी तरह अस्तित्व में हैं। बिहार में ज़िंदगी हर लिहाज़ से बेहद कठोर है। यहाँ कड़ाके की ठंड पड़ती है, और बाढ़ हर साल जानलेवा होती है, लोग तकलीफ़ में रहते हैं और मौत का कोई हिसाब नहीं। मेरा मतलब है कि बिहारी ज़िंदगी फुटबॉल के खेल जैसी है, बस हमें हर तरफ़ से मार झेलनी पड़ती है, लेकिन हम बहादुर दिल वाले हैं जो अपनी परिस्थितियों से खुद निपटते हैं। हम असली योद्धा हैं जो हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं। यही मेरी कलाओं को रचने और सभी दुखद सच्चाइयों से बचने की ऊर्जा है।

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