मधेपुरा/ अपने अजब गजब हरकतों के लिए हमेशा चर्चा में रहे बीएनएमयू ने जिस विषय में कई सत्र का संचालन किया एक आरटीआई के जवाब में उस पाठ्यक्रम के संचालन से ही इंकार कर अजीबोगरीब हरकत का प्रमाण दिया है।
छात्र नेता सह आरटीआई कार्यकर्ता हर्ष वर्धन सिंह राठौर द्वारा मई माह मे सूचना के अधिकार के तहत बीएनएमयू में संचालित बिलिस एवम् एमलिस के शिक्षकों एवम् शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की सूची उनकी नियुक्ति व योगदान तिथि के साथ मांग की थी।जिसके जवाब में विश्वविद्यालय ने अठाईस जून को भेजे जवाब में पुस्तकालय एवम् सूचना विज्ञान विभाग के समन्वयक के हवाले से जवाब दिया कि बीएनएमयू मुख्यालय परिसर में बिलिस एवम् एमलिस करके कोई पाठ्यक्रम नहीं चलता। यह जवाब अपने आप में कई सवालों को जन्म देता है कि अगर यह पाठ्यक्रम नहीं चलता तो फिर इसके नाम पर बीएनएमयू परिसर स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में विगत कई वर्षों से दर्जनों छात्रों को रिजल्ट किस विषय में दिया जा रहा है।

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आरटीआई कार्यकर्ता सह छात्र नेता हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने बीएनएमयू की कार्यशाली पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर यह पाठ्यक्रम संचालित नहीं है तो विगत दीक्षांत समारोह में इसमें पहली बार गोल्ड मेडल किस आधार पर दिया गया साथ ही समय समय पर इससे जुड़ी जो खबरें आती रही बीएनएमयू द्वारा आधिकारिक तौर पर खंडन क्यों नही किया गया।
विश्वविद्यालय की इस करतूत पर तल्ख टिप्पणी करते हुए राठौर ने कहा कि विश्वविद्यालय को यह साफ करना चाहिए कि आखिर हकीकत क्या है क्योंकि इसमें बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य टिका हुआ है।अगर कोई भी बखेड़ा हुआ तो इसका सबसे बड़ा खामियाजा छात्रों को ही उठाना पड़ेगा।

राठौर ने कुलपति से मांग किया कि विश्वविद्यालय अन्तर्गत जो भी पाठ्यक्रम संचालित हैं उससे जुड़ी हर जानकारी में पारदर्शिता होनी चाहिए जिसका घोर अभाव देखने को मिलता है।