पूर्णिया : गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सद्गुरु हंस कबीर मठ सहवानी में सत्संग व भंडारा का किया गया आयोजन
लालमोहन कुमार@जानकीनगर,पूर्णिया
जानकीनगर थाना अंतर्गत सद्गुरु हंस कबीर मठ सहवानी के प्रांगण में प्रत्येक वर्ष की भांति गुरु पूर्णिमा के पावन शुभ अवसर पर परम पूज्य महंत श्री श्री 108 भूप नारायण गोस्वामी साहेब के सानिध्य में एक दिवसीय सत्संग व भंडारा का आयोजन किया गया। जिसमें दूर-दूर से पधारे संत गुरुजनों ने अपने कल्याणकारी विचारों से भक्तों को लाभान्वित किए।
परम पूज्य महंत भूपनारायण गोस्वामी साहेब ने कहा- गुरु को माथे राखिए चलिए आज्ञा माहि, कहै कबीर ता दास को। तीन लोक डर नाहि। यह महर्षि वेदव्यास का मानवतावादी और शाश्वत विचार समस्त मानव प्राणियों के लिए अनुकरणीय है । जिसके जीवन में सद्गुरु प्रदत्त ज्ञान रूपी दीप का प्रज्वलन हो जाता है ,उसके जीवन से दुख संकट समस्याएं रूपी अंधकार का निराकरण निवारण सदा सदा के लिए हो जाता है। गुरु रूपी सूर्य जिसके जीवन में प्रकट हो गया उसके जीवन से अंधकार को नकारात्मक चीजें जितनी सारी है सदा के लिए उसके जीवन से समापन हो जाता है।

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पूज्य संत डॉक्टर जीवंत स्वरूप साहेब ने कहा- गुरु है बड़ा गोविंद से, मन में देख विचार! हरि सिरजै तो बार-बार, गुरु सिर जै तो पारl परम पूज्य महंत चंदन साहब ने कहा – गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है ,गढ़ी गढ़ी काढिं खोट, अंदर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट । परम पूज्य संत उमेश साहेब ने कहा “गुरु की महिमा अनंत है। अनंत किया उपकार ,लोचन अनंत उघड़िया , अनंत किया उपकार । संत धीरेंद्र साहेब ने कहा – दीनबंधु करुणा यतन, सतगुरु सत्य कबीर। पद सरोज नित नमन करूं, दूर के भव भीर । संत विजय साहब ने कहा- गुरु मिले शीतल भया , मीटि मोह संताप, निशि वासर सुख निधि लहू ,अंतर परगटे आप ।
संत केसी साहेब ने संगीत से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिए। राजा जनक के स्वरूप संत गुरुजनों प्रति अगाध प्रेम व श्रद्धा रखने वाले , मठ-मंदिरों के विकास को उन्नति की ओर ले जाने के लिए अपनी गाढ़ी कमाई का अंशदान देकर अपना जीवन सत्य के रास्ते में लगाये रखते हैं । मैं संत गुरुजनों से और अपने इष्ट-सद्गुरु से इनकी सुखद जीवन जीने की व लंबी आयु के लिये मंगलकामना करता हूँ कि साहेब स्वस्थ व निरोग हो। सद्गुरु हंस कबीर मठ सहवानी के उत्तराधिकारी संत अमरदीप गोस्वामी साहेब ने कहा- गुरु के सुमिरण मात्र से नाशत विघ्न अनंतl ताते सर्वारम्भ में ध्यावत है सब संत।आज आध्यात्मिक जगत के समस्त साधकों के लिए बड़ा ही पावन अवसर है क्योंकि गुरु भक्तों के लिए गुरु पर्व से बड़ा कोई पर्व नहीं होता, कोई महोत्सव नहीं होता । दुनिया के जितने आध्यात्मिक मार्ग में चलने वाले साधक साधिकाएं हैं सबके लिए आज एक पर्व है। मूलतः यह पर्व महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के अवसर पर मनाया जाता है । महर्षि वेदव्यास वैसे तो चारों वेदों के संपादक 18 पुराण के लेखक और सनातन परंपरा में आने वाले जितने सारे धर्म ग्रंथ हैं उसमें कहीं ना कहीं किसी न किसी रूप में उनके कलम का हस्ताक्षर हुआ हैl महर्षि वेदव्यास ने कहा अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनम द्वयम हे ! लोगो अट्ठारह में जितने सारे धर्म ग्रंथ हैं व्यास देव की उनमें जितनी वाणीया है उनमें दो वानिया प्रमुख है अष्टादश पुराणेषु व्यासस्य वचनम द्वयं। परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडमl गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित सत्संग में श्रद्धालुओं की काफी संख्या में भीड़ देखी गई ।