Kosi Times
तेज खबर ... तेज असर

हमने पुरानी ख़बरों को archieve पे डाल दिया है, पुरानी ख़बरों को पढ़ने के लिए archieve.kositimes.com पर जाएँ।

- Sponsored -

- Sponsored -

- sponsored -

बाल विवाह समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा को ले बैठक आयोजित

- Sponsored -

मधेपुरा ब्यूरो/जिले के सामाजिक शैक्षणिक कल्याण संघ चौसा कार्यालय में बुधवार को लोक भारती सेवा आश्रम मधेपुरा द्वारा बाल विवाह, मानव ट्रेफिंग, बाल श्रम समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर राजेश कुमार झा ने की।

बैठक को संबोधित करते हुए लोक भारती सेवा आश्रम के सचिव पंचम नारायण सिंह ने कहा कि कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन नई दिल्ली के सौजन्य से मधेपुरा जिला के विभिन्न प्रखंडों में बाल विवाह को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है। जिससे बाल विवाह मुक्त भारत का निर्माण हो सके। उन्होंने
बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव की रोकथाम को लेकर किये जा रहे कार्यों पर न केवल प्रकाश डाला, बल्कि अभिभावकों और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा किये जाने वाले सहयोग पर भी चर्चा की।

विज्ञापन

विज्ञापन

सामाजिक शैक्षणिक कल्याण संघ के संरक्षक सत्यप्रकाश गुप्ता विदुर  ने कहा कि बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव कानूनन अपराध है और इस पर रोक तभी लगेगी, जब लोग जागरूक होंगे और अपनी जिम्मदारियों को सही तरीके से निभाएंगे। सरकार और कानून के भरोसे हम बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव पर रोक नहीं लगा सकते। इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत खुद को जागरूक करने के साथ-साथ अभिभावकों और समाज के लोगों को अपनी जिम्मेवारियों को सही तरीके से निभाना होगा।

साहित्यकार संजय कुमार सुमन ने कहा कि बाल विवाह के नाम पर आज महिला वर्ग के साथ अन्याय हो रहा है, वे चाह कर भी कुछ बोलने का सामर्थ्य नहीं उठा पाती है।आज का समाज पहले के मुकाबले बहुत आगे निकल चुका है। ऐसे में पुरानी प्रथा के साथ जीवन यापन करना पूरी तरह से गलत है। इस तरह की शादी से लड़कियों को जीवन भर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। भारत में कानूनी दृष्टि से 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह करना बाल विवाह की श्रेणी में आता है, जो कि कानूनी अपराध है।शिक्षक जवाहर चौधरी ने कहा कि विवाह में अधिक खर्च आता है, जिससे बचने के लिए कई परिवार वाले अपने बच्चों का बाल विवाह कर देते है।बाल विवाह के कारण शिशु मृत्यु दर में भी तेजी देखने को मिलती है, क्योंकि मां का शरीर बच्चे को जन्म देने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ रहता है।

शिक्षक नेता सुबोध कुमार पासवान ने कहा कि बाल विवाह और बाल श्रम गंभीर सामाजिक बुराइयां हैं, जिन्हें दूर किए बिना सशक्त समाज की परिकल्पना नहीं की जा सकती है।
इस चर्चा में लोक भारती सेवा आश्रम मधेपुरा के सचिव पंचम नारायण सिंह, प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर राजा  विराट, डिस्ट्रिक्ट कोऑर्डिनेटर राजेश कुमार झा, संघ के संरक्षक सत्यप्रकाश गुप्ता विदुर, सचिव सह साहित्यकार संजय कुमार सुमन, कोषाध्यक्ष आशीष कुमार, प्रोफेसर मनोज कुमार यादव, शिक्षक सुबोध कुमार पासवान, जवाहर चौधरी समेत अन्य संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

- Sponsored -

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

आर्थिक सहयोग करे

- Sponsored -

Leave A Reply

Your email address will not be published.